VIVART
Friday, September 26, 2008
बहुत पहले से उन कदमो की आहत जान लेते है
तुझे आये ज़िन्दगी हम दूर से पहचान लेते है
तबियत अपनी घबराती है जब सुनसान रातो मे
हम ऐसे मे तेरी यादो की चादर तान लेते है
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